मिर्जापुर के विंध्याचल में विराजमान माँ विंध्यवासिनी की यह आरती नवरात्रि में विशेष रूप से गाई जाती है. रोचक बात यह है कि यही आरती मैहर और हिंगलाज में भी गाई जाती है. नीचे संपूर्ण आरती हिंदी में, अंग्रेजी लिप्यंतरण में और अर्थ सहित दी गई है.
विंध्येश्वरी आरती (Hindi)
सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, तेरा पार न पाया। पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले तेरी भेंट चढ़ाया॥ सुवा चोली तेरे अंग विराजै, केसर तिलक लगाया। नंगे पग अकबर आया, सोने का छत्र चढ़ाया॥ ऊँचे ऊँचे पर्वत बना देवालय, नीचे शहर बसाया। सत्युग त्रेता द्वापर मध्ये, कलियुग राज सवाया॥ धूप दीप नैवेद्य आरती, मोहन भोग लगाया। ध्यानू भगत मैया तेरे गुण गावैं, मनवांछित फल पाया॥
Vindhyeshwari Aarti in English
sun meri devi parvatavasini, tera par na paya| pan supari dhvaja nariyal, le teri bhent chadhaya|| suva choli tere ang virajai, kesar tilak lagaya| nange pag akabar aya, sone ka chhatra chadhaya|| unche unche parvat bana devalay, niche shahar basaya| satyug treta dvapar madhye, kaliyug raj savaya|| dhup dip naivedya arati, mohan bhog lagaya| dhyanu bhagat maiya tere gun gavain, manavanchhit phal paya||
आरती का अर्थ (Meaning in Hindi)
भक्त पर्वत पर विराजने वाली देवी से कहता है कि तेरा पार कोई नहीं पा सका, और पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल की भेंट चढ़ाता है. दूसरे पद में देवी के अंग पर सजी चोली और केसर का तिलक आता है, और यह प्रसिद्ध पंक्ति आती है कि अकबर नंगे पाँव आया और सोने का छत्र चढ़ाया. तीसरे पद में पर्वत पर बने देवालय और नीचे बसे शहर का वर्णन है. अंत में ध्यानू भगत का उल्लेख है, जिसने देवी के गुण गाकर मनवांछित फल पाया.
Meaning in English
The devotee tells the goddess who dwells on the mountain that no one has ever found her limit, and offers betel leaf, areca nut, a flag and a coconut. The second verse describes the bodice on her body and the saffron tilak, and carries the well known line that Akbar came barefoot and offered a canopy of gold. The third describes the temple built on the high peak with the town settled below it. The closing verse names Dhyanu Bhagat, who sang her praises and received what his heart desired.
विंध्येश्वरी आरती का महत्व
विंध्याचल उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में गंगा के किनारे है और इसे शक्तिपीठ माना जाता है. नवरात्रि में यहाँ लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. यही आरती मैहर की शारदा माता और हिंगलाज माता के लिए भी गाई जाती है, जो इसके पारंपरिक होने का संकेत है.
आरती जानकारी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
विंध्यवासिनी मंदिर कहाँ है?
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में विंध्याचल में, गंगा के किनारे.
आरती में अकबर का उल्लेख क्यों है?
परंपरा के अनुसार अकबर ने देवी के आगे नंगे पाँव आकर सोने का छत्र चढ़ाया था. यह प्रसंग ध्यानू भगत की कथा से जुड़ा है.
क्या यही आरती मैहर में भी गाई जाती है?
हाँ. यही पाठ मैहर वाली माता और हिंगलाज माता के लिए भी गाया जाता है.