विवाह पंचमी और जानकी जयंती पर माता सीता की यह आरती गाई जाती है। राम दरबार की पूजा में भी यह आरती साथ गाई जाती है। नीचे पूरे बोल हिंदी में, अंग्रेज़ी में और साथ में सरल अर्थ दिया गया है।
सीता माता आरती के बोल (Hindi)
आरती श्री जनक दुलारी की । सीताजी रघुवर प्यारी की ॥ जगत जननी जग की विस्तारिणि, नित्य सत्य साकेत-विहारिणि, परम दयामयी दीनोद्वारिणि, सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥ आरती श्री जनक दुलारी की । सीताजी रघुवर प्यारी की ॥ सती श्रोमणि पति हित कारिणि, पति सेवा हित वन-वन चारिणि, पति हित पति वियोग स्वीकारिणि, त्याग धर्म मूरति धारी की ॥ आरती श्री जनक दुलारी की । सीताजी रघुवर प्यारी की ॥ विमल कीर्ति सब लोकन छाई, नाम लेत पावन मति आई, सुमिरत कटत कष्ट दुखदाई, शरणागत जन भय-हारी की ॥ आरती श्री जनक दुलारी की । सीताजी रघुवर प्यारी की ॥
Sita Mata Aarti Lyrics in English
Aarti Shri Janak Dulari ki. Sitaji Raghuvar pyari ki. Jagat janani jag ki vistarini, Nitya satya Saket-viharini, Param dayamayi deenoddharini, Sita Maiya bhaktan hitkari ki. Aarti Shri Janak Dulari ki. Sitaji Raghuvar pyari ki. Sati shromani pati hit karini, Pati seva hit van-van charini, Pati hit pati viyog sweekarini, Tyag dharm murti dhari ki. Aarti Shri Janak Dulari ki. Sitaji Raghuvar pyari ki. Vimal keerti sab lokan chhayi, Naam let pavan mati aayi, Sumirat katat kasht dukhdayi, Sharanagat jan bhay-hari ki. Aarti Shri Janak Dulari ki. Sitaji Raghuvar pyari ki.
आरती का अर्थ (Meaning)
पहली पंक्ति में माता सीता को जनक की दुलारी और राम की प्यारी कहा गया है। पहला छंद उन्हें जगत जननी और साकेत में रहने वाली दयामयी देवी बताता है, जो दीनों का उद्धार करती हैं। दूसरा छंद उनके जीवन का सार है, पति के हित के लिए वन-वन भटकना और फिर वियोग तक स्वीकार कर लेना, इसीलिए उन्हें त्याग की मूर्ति कहा गया है। तीसरा छंद कहता है कि उनकी निर्मल कीर्ति सभी लोकों में फैली है, नाम लेने से बुद्धि पवित्र होती है और स्मरण से कष्ट कट जाते हैं।
सीता माता आरती का महत्व
विवाह पंचमी को भगवान राम और माता सीता के विवाह का दिन माना जाता है। यह मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पंचमी को पड़ती है। अयोध्या, जनकपुर और मिथिला में इस दिन बड़ा उत्सव होता है और राम-सीता का विवाह दोहराया जाता है। राम दरबार की रोज़ की पूजा में भी यह आरती राम आरती के साथ गाई जाती है। साल 2026 में विवाह पंचमी 14 दिसंबर, सोमवार को है।
आरती जानकारी
| देवता | माता सीता (जानकी) |
| भाषा | हिंदी |
| प्रकार | आरती |
| अवसर | विवाह पंचमी, जानकी जयंती, राम नवमी |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सीता माता की आरती कब गाई जाती है?
विवाह पंचमी और जानकी जयंती पर खास तौर पर, और राम दरबार की रोज़ की पूजा में राम आरती के साथ।
विवाह पंचमी क्या है?
यह मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी का दिन है, जिसे भगवान राम और माता सीता के विवाह की तिथि माना जाता है।
साल 2026 में विवाह पंचमी कब है?
14 दिसंबर 2026, सोमवार को।