कालभैरव जयंती और हर माह की कालाष्टमी पर भैरव जी की यह आरती गाई जाती है। वही आरती बटुक भैरव और काल भैरव, दोनों रूपों के लिए गाई जाती है। नीचे पूरे बोल हिंदी में, अंग्रेज़ी में और साथ में सरल अर्थ दिया गया है।
काल भैरव आरती के बोल (Hindi)
ॐ जय भैरव देवा प्रभु, जय भैरव देवा । सुर नर मुनि सब करते, प्रभु तुम्हरी सेवा ॥ ॥ ॐ जय भैरव देवा..॥ तुम पाप उद्धारक, दुःख सिन्धु तारक । भक्तों के सुखकारक, भीषण वपु धारक ॥ ॥ ॐ जय भैरव देवा..॥ वाहन श्वान विराजत, कर त्रिशूल धारी । महिमा अमित तुम्हारी, जय जय भयहारी ॥ ॥ ॐ जय भैरव देवा..॥ तुम बिन शिव सेवा, सफल नहीं होवे । चतुर्वतिका दीपक, दर्शन दुःख खोवे ॥ ॥ ॐ जय भैरव देवा..॥ तेल चटकी दधि मिश्रित, माषावली तेरी । कृपा कीजिये भैरव, करिये नहिं देरी ॥ ॥ ॐ जय भैरव देवा..॥ पाँवों घूंघरू बाजत, डमरू डमकावत । बटुकनाथ बन बालक, जन मन हरषावत ॥ ॥ ॐ जय भैरव देवा..॥ बटुकनाथ की आरती, जो कोई जन गावे । कहे धरणीधर वह नर, मन वांछित फल पावे ॥ ॥ ॐ जय भैरव देवा..॥
Kaal Bhairav Aarti Lyrics in English
Om jai Bhairav Deva Prabhu, Jai Bhairav Deva. Sur nar muni sab karte, Prabhu tumhri seva. || Om jai Bhairav Deva.. || Tum paap uddharak, Dukh sindhu tarak. Bhakton ke sukhkarak, Bheeshan vapu dharak. || Om jai Bhairav Deva.. || Vahan shwan virajat, Kar trishul dhari. Mahima amit tumhari, Jai jai bhayhari. || Om jai Bhairav Deva.. || Tum bin Shiv seva, Safal nahin hove. Chaturvatika deepak, Darshan dukh khove. || Om jai Bhairav Deva.. || Tel chatki dadhi mishrit, Mashavali teri. Kripa kijiye Bhairav, Kariye nahin deri. || Om jai Bhairav Deva.. || Panvon ghunghroo bajat, Damru damkavat. Batuknath ban balak, Jan man harshavat. || Om jai Bhairav Deva.. || Batuknath ki aarti, Jo koi jan gaave. Kahe Dharanidhar vah nar, Man vanchhit phal paave. || Om jai Bhairav Deva.. ||
आरती का अर्थ (Meaning)
पहले छंद में कहा गया है कि देवता, मनुष्य और मुनि सभी भैरव जी की सेवा करते हैं। दूसरा छंद उन्हें पाप से उद्धार करने वाला और दुख के सागर से पार लगाने वाला कहता है, जिनका रूप भले ही भय जगाने वाला हो। तीसरे छंद में उनकी पहचान है, श्वान यानी कुत्ता उनका वाहन है और हाथ में त्रिशूल। चौथा छंद कहता है कि भैरव की पूजा के बिना शिव की सेवा पूरी नहीं मानी जाती, और चार बत्ती वाले दीपक के दर्शन से दुख दूर होते हैं। पाँचवाँ छंद भोग का है, तेल, दही और उड़द। अंतिम छंद में धरणीधर नाम के रचयिता कहते हैं कि जो यह आरती गाता है उसे मनचाहा फल मिलता है।
काल भैरव आरती का महत्व
भैरव को भगवान शिव का रौद्र रूप माना जाता है और उन्हें क्षेत्रपाल यानी नगर का रक्षक कहा जाता है। कालभैरव जयंती मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को मनाई जाती है। उज्जैन का कालभैरव मंदिर और काशी का कालभैरव मंदिर सबसे प्रसिद्ध हैं। काशी में मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन से पहले कालभैरव के दर्शन किए जाते हैं। यही आरती बटुक भैरव की पूजा में भी गाई जाती है, इसीलिए अंतिम छंद में बटुकनाथ का नाम आता है। साल 2026 में कालभैरव जयंती 1 दिसंबर, मंगलवार को है।
आरती जानकारी
| देवता | काल भैरव (भैरव जी) |
| भाषा | हिंदी |
| प्रकार | आरती |
| अवसर | कालभैरव जयंती, कालाष्टमी, रविवार और मंगलवार |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
काल भैरव आरती कब गाई जाती है?
कालभैरव जयंती और हर माह की कालाष्टमी पर। कई भक्त रविवार और मंगलवार को भी यह आरती करते हैं।
क्या यही आरती बटुक भैरव की भी है?
हाँ। यह आरती बटुक भैरव और काल भैरव, दोनों रूपों के लिए गाई जाती है, इसीलिए अंतिम छंद में बटुकनाथ का नाम आता है।
साल 2026 में कालभैरव जयंती कब है?
1 दिसंबर 2026, मंगलवार को।