घालीन लोटांगण वह प्रार्थना है जो सब आरतियों के आखिर में गाई जाती है। घर हो या मंडल का गणपति उत्सव, आरती तभी पूरी मानी जाती है जब यह पढ़ी जाए। पहला छंद संत नामदेव का मराठी में है, बाकी तीन संस्कृत श्लोक हैं। नीचे पूरे बोल, अंग्रेज़ी में पढ़ने की सुविधा और सरल अर्थ दिया गया है।
घालीन लोटांगण आरती के बोल (Marathi)
घालीन लोटांगण, वंदीन चरण । डोळ्यांनी पाहीन रुप तुझें । प्रेमें आलिंगन, आनंदे पूजिन । भावें ओवाळीन म्हणे नामा ॥ त्वमेव माता च पिता त्वमेव । त्वमेव बंधुक्ष्च सखा त्वमेव । त्वमेव विध्या द्रविणं त्वमेव । त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥ कायेन वाचा मनसेंद्रीयेव्रा, बुद्धयात्मना वा प्रकृतिस्वभावात । करोमि यध्य्त सकलं परस्मे, नारायणायेति समर्पयामि ॥ अच्युतं केशवं रामनारायणं, कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम । श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं, जानकीनायकं रामचंद्र भजे ॥
Ghalin Lotangan Aarti Lyrics in English
Ghalin lotangan, vandin charan. Dolyanni pahin roop tujhe. Premen alingan, anande pujin. Bhaven ovalin mhane Nama. Tvameva mata cha pita tvameva. Tvameva bandhushcha sakha tvameva. Tvameva vidya dravinam tvameva. Tvameva sarvam mama devadeva. Kayena vacha manasendriyairva, Buddhyatmana va prakriti svabhavat. Karomi yadyat sakalam parasmai, Narayanayeti samarpayami. Achyutam Keshavam Ramanarayanam, Krishnadamodaram Vasudevam Harim. Shridharam Madhavam Gopikavallabham, Janakinayakam Ramachandram bhaje.
आरती का अर्थ (Meaning)
पहले छंद में भक्त कहता है: मैं लोटांगण करके आपके चरण वंदन करूँगा, आँखों से आपका रूप देखूँगा और प्रेम से आरती उतारूँगा – यह संत नामदेव के शब्द हैं। दूसरा श्लोक कहता है कि आप ही माता, पिता, भाई, सखा, विद्या और धन हैं। तीसरे में भक्त अपना हर कर्म – शरीर, वाणी, मन और बुद्धि से किया गया – नारायण को समर्पित करता है। आखिरी श्लोक भगवान के नामों की माला है।
घालीन लोटांगण का महत्व
महाराष्ट्र में यह सबसे ज़्यादा गाई जाने वाली प्रार्थना है। सुखकर्ता दुखहर्ता और बाकी आरतियों के बाद सब लोग खड़े होकर यही पढ़ते हैं, फिर मंत्रपुष्पांजलि होती है। खास बात यह है कि यह किसी एक देवता तक सीमित नहीं है – गणपति, देवी, शंकर या विठ्ठल, किसी भी पूजा के अंत में यही प्रार्थना चलती है।
आरती जानकारी
| देवता | नारायण (सभी देवताओं की आरती के अंत में) |
| भाषा | मराठी एवं संस्कृत |
| प्रकार | प्रार्थना |
| अवसर | गणेश चतुर्थी, आरती संग्रह |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
घालीन लोटांगण कब पढ़ते हैं?
सब आरतियाँ हो जाने के बाद, मंत्रपुष्पांजलि से पहले। यह पूजा को पूरा करने वाली प्रार्थना मानी जाती है।
पहला छंद किसने लिखा है?
पहला छंद संत नामदेव का है। आखिरी शब्द म्हणे नामा उनकी पहचान है।
क्या यह किसी एक देवता की आरती है?
नहीं। यह किसी भी देवता की पूजा के अंत में पढ़ी जाती है। संस्कृत श्लोकों में समर्पण नारायण को किया गया है।