धनतेरस पर भगवान धन्वन्तरि की पूजा के बाद यह आरती गाई जाती है। धन्वन्तरि आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं, जो समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। नीचे पूरे बोल हिंदी में, अंग्रेज़ी में और साथ में सरल अर्थ दिया गया है।
धन्वन्तरि आरती के बोल (Hindi)
जय धन्वन्तरि देवा, जय धन्वन्तरि जी देवा । जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा ॥ ॥ जय धन्वन्तरि देवा..॥ तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए । देवासुर के संकट, आकर दूर किए ॥ ॥ जय धन्वन्तरि देवा..॥ आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया । सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया ॥ ॥ जय धन्वन्तरि देवा..॥ भुजा चार अति सुन्दर, शंख सुधा धारी । आयुर्वेद वनस्पति से, शोभा भारी ॥ ॥ जय धन्वन्तरि देवा..॥ तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे । असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे ॥ ॥ जय धन्वन्तरि देवा..॥ हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा । वैद्य-समाज तुम्हारे, चरणों का घेरा ॥ ॥ जय धन्वन्तरि देवा..॥ धन्वन्तरिजी की आरती, जो कोई नर गावे । रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे ॥ ॥ जय धन्वन्तरि देवा..॥
Dhanvantari Aarti Lyrics in English
Jai Dhanvantari Deva, Jai Dhanvantari ji Deva. Jara-rog se peedit, Jan-jan sukh deva. || Jai Dhanvantari Deva.. || Tum samudra se nikle, Amrit kalash liye. Devasur ke sankat, Aakar door kiye. || Jai Dhanvantari Deva.. || Ayurved banaya, Jag mein failaya. Sada swasth rahne ka, Sadhan batlaya. || Jai Dhanvantari Deva.. || Bhuja chaar ati sundar, Shankh sudha dhari. Ayurved vanaspati se, Shobha bhari. || Jai Dhanvantari Deva.. || Tum ko jo nit dhyave, Rog nahin aave. Asadhya rog bhi uska, Nishchay mit jave. || Jai Dhanvantari Deva.. || Haath jodkar Prabhuji, Das khada tera. Vaidya-samaj tumhare, Charnon ka ghera. || Jai Dhanvantari Deva.. || Dhanvantari ji ki aarti, Jo koi nar gaave. Rog-shok na aaye, Sukh-samriddhi paave. || Jai Dhanvantari Deva.. ||
आरती का अर्थ (Meaning)
आरती भगवान धन्वन्तरि को वह देवता कहती है जो बुढ़ापे और रोग से दुखी लोगों को सुख देते हैं। दूसरा छंद समुद्र मंथन की कथा है, जिसमें वे अमृत कलश लेकर निकले और देवताओं तथा असुरों का संकट दूर किया। तीसरे छंद में कहा गया है कि उन्होंने आयुर्वेद बनाकर संसार को स्वस्थ रहने का रास्ता बताया। चौथे छंद में उनका रूप है, चार भुजाएँ, शंख और अमृत। आगे कहा गया है कि जो रोज़ उनका ध्यान करता है उसे रोग नहीं छूते और असाध्य रोग भी मिट जाते हैं। अंतिम छंद में वैद्य समाज उनके चरणों में खड़ा है, और आरती गाने वाले को रोग-शोक से मुक्ति तथा समृद्धि का वरदान मिलता है।
धन्वन्तरि आरती का महत्व
धनतेरस को धन्वन्तरि त्रयोदशी भी कहा जाता है, क्योंकि इसी तिथि पर भगवान धन्वन्तरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। यह दिन पाँच दिन के दिवाली उत्सव का पहला दिन है। इस दिन देवी लक्ष्मी और कुबेर के साथ धन्वन्तरि की भी पूजा होती है, और आयुर्वेद से जुड़े लोग इसे आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाते हैं। स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना से यह आरती गाई जाती है। साल 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को है।
आरती जानकारी
| देवता | भगवान धन्वन्तरि |
| भाषा | हिंदी |
| प्रकार | आरती |
| अवसर | धनतेरस, धन्वन्तरि त्रयोदशी, आयुर्वेद दिवस |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
धन्वन्तरि आरती कब गाई जाती है?
धनतेरस की शाम को प्रदोष काल में धन्वन्तरि पूजा के बाद यह आरती गाई जाती है। कई लोग इसे रोज़ स्वास्थ्य की कामना से भी गाते हैं।
भगवान धन्वन्तरि कौन हैं?
वे आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं और भगवान विष्णु के अवतार हैं, जो समुद्र मंथन के समय अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
साल 2026 में धनतेरस कब है?
6 नवंबर 2026, शुक्रवार को।