Aarti Lyrics

Annapurna Mata Aarti Lyrics in Hindi

अन्नपूर्णा जयंती पर और रसोई में अन्न की पूजा के समय माँ अन्नपूर्णा की यह आरती गाई जाती है। नीचे पूरे बोल हिंदी में, अंग्रेज़ी में और साथ में सरल अर्थ दिया गया है।

अन्नपूर्णा आरती के बोल (Hindi)

बारम्बार प्रणाम,
मैया बारम्बार प्रणाम ।

जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,
कहां उसे विश्राम ।
अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारे,
लेते होत सब काम ॥
॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम ॥

प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर,
कालान्तर तक नाम ।
सुर सुरों की रचना करती,
कहाँ कृष्ण कहाँ राम ॥
॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम ॥

चूमहि चरण चतुर चतुरानन,
चारु चक्रधर श्याम ।
चन्द्र चूड़ चन्द्रानन चाकर,
शोभा लखहि ललाम ॥
॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम ॥

देवी देव दयनीय दशा में,
दया दया तव नाम ।
त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल,
शरण रूप तव धाम ॥
॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम ॥

श्रीं, ह्रीं, श्रद्धा, श्रीं ऐं विद्या,
श्रीं क्लीं कमल काम ।
कान्तिभ्रांतिमयी कांति शांतिमयी,
वर देतु निष्काम ॥
॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम ॥

Annapurna Mata Aarti Lyrics in English

Barambar pranam,
Maiya barambar pranam.

Jo nahin dhyave tumhen Ambike,
Kahan use vishram.
Annapurna Devi naam tihare,
Lete hot sab kaam.
|| Barambar pranam, Maiya barambar pranam ||

Pralay yugantar aur janmantar,
Kalantar tak naam.
Sur suron ki rachna karti,
Kahan Krishna kahan Ram.
|| Barambar pranam, Maiya barambar pranam ||

Chumahi charan chatur chaturanan,
Charu chakradhar Shyam.
Chandra chood chandranan chakar,
Shobha lakhahi lalam.
|| Barambar pranam, Maiya barambar pranam ||

Devi dev dayaniya dasha mein,
Daya daya tav naam.
Trahi-trahi sharanagat vatsal,
Sharan roop tav dham.
|| Barambar pranam, Maiya barambar pranam ||

Shreem, Hreem, Shraddha, Shreem Aim Vidya,
Shreem Kleem kamal kaam.
Kantibhrantimayi kanti shantimayi,
Var detu nishkaam.
|| Barambar pranam, Maiya barambar pranam ||

आरती का अर्थ (Meaning)

आरती माँ अन्नपूर्णा को बार-बार प्रणाम से शुरू होती है। पहला छंद कहता है कि जो उनका ध्यान नहीं करता उसे विश्राम नहीं मिलता, और उनका नाम लेते ही सब काम पूरे हो जाते हैं। दूसरा छंद कहता है कि उनका नाम प्रलय, युगांतर और जन्मांतर तक रहता है। तीसरे छंद में ब्रह्मा, विष्णु और शिव तक उनके चरण चूमते हैं। चौथा छंद शरण में आए भक्त की पुकार है। अंतिम छंद बीज मंत्रों से बना है और माँ से निष्काम वर माँगता है।

अन्नपूर्णा आरती का महत्व

माँ अन्नपूर्णा अन्न और पोषण की देवी हैं। काशी में उनका प्रसिद्ध मंदिर है और कथा है कि स्वयं भगवान शिव ने उनसे भिक्षा माँगी थी। अन्नपूर्णा जयंती मार्गशीर्ष पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन रसोई, चूल्हे और अन्न की पूजा की जाती है और अन्नदान का विशेष महत्व है। कई घरों में भोजन बनाने से पहले यह आरती रोज़ गाई जाती है। साल 2026 में अन्नपूर्णा जयंती 23 दिसंबर, बुधवार को है।

आरती जानकारी

देवतामाँ अन्नपूर्णा
भाषाहिंदी
प्रकारआरती
अवसरअन्नपूर्णा जयंती, मार्गशीर्ष पूर्णिमा, अन्नदान

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

अन्नपूर्णा आरती कब गाई जाती है?

अन्नपूर्णा जयंती पर और कई घरों में भोजन बनाने से पहले रोज़ भी।

अन्नपूर्णा जयंती कब होती है?

मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को। साल 2026 में यह 23 दिसंबर, बुधवार को है।

माँ अन्नपूर्णा का मुख्य मंदिर कहाँ है?

काशी यानी वाराणसी में, काशी विश्वनाथ मंदिर के पास।