धनतेरस और दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के साथ धन के रक्षक कुबेर देव की यह आरती गाई जाती है। नीचे पूरे बोल हिंदी में, अंग्रेज़ी में और साथ में सरल अर्थ दिया गया है।
कुबेर आरती के बोल (Hindi)
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे । शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे ॥ ॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे..॥ शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े, स्वामी भक्त कुबेर बड़े । दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥ ॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे..॥ स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे । योगिनी मंगल गावैं, सब जय जय कार करैं ॥ ॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे..॥ गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे । दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें ॥ ॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे..॥ भाँति भाँति के व्यंजन, बहुत बने । मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने ॥ ॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे..॥ बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े । अपने भक्त जनों के, सारे काम संवारे ॥ ॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे..॥ मुकुट मणी की शोभा, मोतियन हार गले । अगर कपूर की बाती, घी की जोत जले ॥ ॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे..॥ यक्ष कुबेर जी की आरती, जो कोई नर गावे । कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे ॥ ॥ ॐ जै यक्ष कुबेर हरे..॥
Kuber Aarti Lyrics in English
Om jai Yaksh Kuber Hare, Swami jai Yaksh jai Yaksh Kuber Hare. Sharan pade bhagton ke, Bhandar Kuber bhare. || Om jai Yaksh Kuber Hare.. || Shiv bhakton mein bhakt Kuber bade, Swami bhakt Kuber bade. Daitya danav manav se, Kai-kai yuddh lade. || Om jai Yaksh Kuber Hare.. || Swarn singhasan baithe, Sir par chhatra phire. Yogini mangal gavain, Sab jai jai kaar karain. || Om jai Yaksh Kuber Hare.. || Gada trishul haath mein, Shastra bahut dhare. Dukh bhay sankat mochan, Dhanush tankaar karen. || Om jai Yaksh Kuber Hare.. || Bhanti bhanti ke vyanjan, Bahut bane. Mohan bhog lagavain, Saath mein urad chane. || Om jai Yaksh Kuber Hare.. || Bal buddhi vidya data, Hum teri sharan pade. Apne bhakt janon ke, Saare kaam sanvare. || Om jai Yaksh Kuber Hare.. || Mukut mani ki shobha, Motiyan haar gale. Agar kapoor ki baati, Ghee ki jot jale. || Om jai Yaksh Kuber Hare.. || Yaksh Kuber ji ki aarti, Jo koi nar gaave. Kahat Premapal Swami, Manvanchhit phal paave. || Om jai Yaksh Kuber Hare.. ||
आरती का अर्थ (Meaning)
आरती कुबेर को यक्षों का स्वामी कहती है, जिनके भण्डार शरण में आए भक्तों के लिए भरे रहते हैं। दूसरा छंद बताता है कि वे शिव के बड़े भक्त हैं और उन्होंने कई युद्ध लड़े। तीसरे और सातवें छंद में उनका दरबार है, सोने का सिंहासन, सिर पर छत्र, मणियों का मुकुट और मोतियों का हार। चौथे छंद में गदा और त्रिशूल जैसे शस्त्रों के साथ वे दुख, भय और संकट दूर करते हैं। पाँचवें छंद में भोग का वर्णन है और छठे में उन्हें बल, बुद्धि तथा विद्या देने वाला कहा गया है। अंतिम छंद में कहा गया है कि यह आरती गाने वाले को मनचाहा फल मिलता है।
कुबेर आरती का महत्व
कुबेर देव संसार की धन-सम्पत्ति के रक्षक माने जाते हैं। धनतेरस और दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन के साथ उनकी पूजा की जाती है, क्योंकि मान्यता है कि लक्ष्मी धन देती हैं और कुबेर उस धन की रक्षा करते हैं। तिजोरी, गल्ला या जहाँ घर का धन रखा जाता है, वहीं कुबेर की पूजा करके यह आरती गाई जाती है। शरद पूर्णिमा पर भी कुबेर पूजा का विधान है। साल 2026 में धनतेरस 6 नवंबर और दिवाली लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर को है।
आरती जानकारी
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
कुबेर आरती कब गाई जाती है?
धनतेरस और दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन के साथ, तिजोरी या धन रखने की जगह पर कुबेर की पूजा करके यह आरती गाई जाती है।
कुबेर देव कौन हैं?
वे यक्षों के स्वामी और धन-सम्पत्ति के रक्षक हैं। शास्त्रों में उन्हें भगवान शिव का बड़ा भक्त बताया गया है।
क्या कुबेर और लक्ष्मी की पूजा साथ होती है?
हाँ, दिवाली पर दोनों की पूजा साथ की जाती है। मान्यता है कि लक्ष्मी धन देती हैं और कुबेर उसकी रक्षा करते हैं।